Sun. Aug 30th, 2026
Dr. Abhaya Singh Tak


डॉ. अभय सिंह टाक

अनादिकाल से शिक्षक की भूमिका अत्यधिक महत्वपूर्ण रही है। शिक्षक केवल पुस्तकीय ज्ञान का प्रदाता न होकर पथ प्रदर्शक भी होता है, जीवन का मार्गदर्शन करने वाला होता है । किंतु अब शिक्षक के पद का दायरा सीमित हो रहा है और इसे केवल विद्यालयी शिक्षण तक समेट दिया गया है। प्रशासकीय व्यवस्था में अब वह सामान्य शासकीय कर्मचारी जैसा बन कर रह गया है। प्रशासकीय व्यवस्था में उसे अनेक ऐसे कार्यों में व्यस्त कर दिया जाता है जिनका शिक्षण से कोई लेना देना नहीं होता है।

यदि शिक्षक नहीं होता तो शिक्षण की कल्पना भी नही की जा सकती थी। शिक्षण की आधारशिला शिक्षक के द्वारा ही रखी जाती है। शिक्षक अपनी गरिमा समझें यदि वह खुद को अकेले कर्मचारी मानने लगेंगे तो इससे बड़ा दुर्भाग्य हो ही नहीं सकता। शिक्षकों को अपने अतीत के गौरव को समझना चाहिए साथ ही उसे खो देने के कारणों पर विचार करके स्वयं में बदलाव लाना चाहिए। अन्यथा यह केवल शिक्षक का पतन नहीं होगा बल्कि सारे राष्ट्र को इसकी कीमत चुकानी होगी। वर्तमान शिक्षा व्यवस्था की स्थिति के लिए राजनीतिक, सामाजिक और शैक्षिक सभी स्तरों पर चिंतन की आवश्यकता है।

गुरु शिष्य परंपरा को कमजोर करने में शिक्षक, छात्र और अभिभावक तीनों का योगदान है। कुछ शिक्षको की कार्य के प्रति उदासीनता, बच्चों की भौतिकवादी सोच और माता-पिता की लापरवाही शिक्षा के स्तर की गिरावट के लिए उत्तरदायी है। अधिकांश अभिभावकों की रुचि सिर्फ पैसा बचाने में रहती है तो कुछ माँ-बाप मात्र सुविधा जुटाना ही अपनी जिम्मेदारी समझते हैं। इसके विपरीत कुछ माँ-बाप अपने बच्चे की योग्यता से कुछ अधिक अपेक्षा रखते हैं और उनके जीवन में तनाव का जाल बना देते हैं। अवसरवादी तत्व इस अवस्था का लाभ उठाते हैं और दिशाभ्रम में अधिकांश विद्यार्थी अपने लक्ष्य से दूर रह जाते हैं। अपने बालक के लिए सही विद्यालय का चयन करने और शिक्षक के साथ समर्पित भाव से जुड़े रहने से ही बालक की प्रतिभा के अनुसार उसे   सुसभ्य तथा प्रगतिशील नागरिक बनाया जा सकता है। भौतिक संसाधनों की चमक से अप्रभावित रखते हुए अपनी अगली पीढी का सर्वांगीण विकास करना ही सही लालन-पालन है। शिक्षक को भी अपना उत्तरदायित्व समझना चाहिए। शिक्षक, बालक तथा अभिभावक के बीच परस्पर समर्पण और संपूर्ण निष्ठा से ही शिक्षण का पुनीत कार्य संभव है।

शिक्षक दिवस पर माननीय शिक्षक वृंद को हार्दिक बधाई। शिक्षक दिवस पर प्रतिवर्ष उन शिक्षकों का सम्मान किया जाता है जोकि जिला, राज्य तथा राष्ट्रीय स्तर पर इस हेतु आवेदन करते हैं। किंतु वे समस्त शिक्षक सदैव आदरणीय हैं जोकि भारत का भविष्य सुधारने में दिन-रात लगे रहते हैं। निजी शिक्षण संस्थानों में कार्यरत शिक्षकों का तो कोई मुकाबला ही नहीं है। बहुत कम मानदेय पर वे समाज को श्रेष्ठतम सेवाएं दे रहे हैं। किंतु कोविड-19 के चलते समाज का बहुत ही लापरवाह रूप सामने आया है। फीस देने में सक्षम व्यक्ति ही अपने बालक-बालिकाओं को निजी शिक्षण संस्थानों में पढ़ाते हैं। उन्हें समझना चाहिए कि वे समय पर अपने बालक-बालिकाओं की फीस जमा करावें ताकि राष्ट्र निर्माण में लगे हुए ये शिक्षक सम्मान पूर्वक अपना मानदेय प्राप्त कर सकें।

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