प्राईवेट स्कूल्स में आनलाईन शिक्षण जरूरी लेकिन सरकारी स्कूल्स में केवल साप्ताहिक होमवर्क ही पर्याप्त
प्रक्रिया के विरुद्ध कोर्ट की चौखट पर प्राईवेट स्कूल्स
गिरिराज खैरीवाल
एक ओर जहां सरकार प्राईवेट स्कूल्स को आनलाईन शिक्षण का विवरण प्रस्तुत करने के लिए बाध्य कर रही है वहीं दूसरी ओर सरकारी स्कूलों में आनलाईन शिक्षण की कोई अनिवार्यता नहीं की गई है। इस वर्ष भी सरकारी शिक्षण संस्थाओं की कक्षा 5 वीं तक सिर्फ साप्ताहिक पढ़ाई हेतु कार्य योजना तय की गई है। इस संबंध में 21 मई को शिक्षामंत्री की अध्यक्षता में प्रमुख शिक्षा सचिव, शिक्षा निदेशक और विभाग के आला अधिकारियों के संभागित्व में आयोजित हुई वेबीनार में निश्चित किया गया है कि आओ घर में सीखें कार्य क्रम जून से अगस्त तक जारी रखा जाए और कक्षा 1 से 5 तक के स्टूडेंट्स को प्रति सप्ताह गृह कार्य दिया जाए। ऐसी ही व्यवस्था पिछले साल आधे सत्र के बाद सरकारी स्कूलों की कक्षा 5 वीं तक के लिए की गई थी।
इस वेबीनार में कक्षा 6 से 12 हेतु स्माईल योजना के अनुसार ई कक्षा व डिजिटल लर्निंग के लिए कहा गया है लेकिन प्राईमरी कक्षाओं को डिजिटल तकनीक से पढाई के लिए कोई निर्देश नहीं दिए गए हैं। जबकि प्राईवेट स्कूल्स से आनलाईन शिक्षण की जानकारी मांगी जा रही है। शिक्षा विभाग की ओर से 5 मई को आदेश जारी किया गया कि प्राईवेट स्कूल्स को यदि आरटीई का भुगतान चाहिए तो वे पी एस पी पोर्टल पर आनलाईन शिक्षण सत्यापन प्रक्रिया के अंतर्गत मांगी गई जानकारी 15 मई तक अपलोड करें। यदि पोर्टल पर यह जानकारी नहीं दी गई तो भुगतान नहीं होने की जिम्मेदारी संबंधित संस्था की होगी। 15 मई तक प्राईवेट स्कूल्स ने इस प्रक्रिया को कोई विशेष रिस्पांस नहीं दिया तथा लगभग 5000 स्कूल्स ने ही जानकारी अपडेट की तो प्रक्रिया की अंतिम तारीख में विभाग ने वृद्धि कर दी। इसे 22 मई तक बढाकर विभाग ने निर्देश दिए कि यह अंतिम अवसर होगा। शिक्षा निदेशक सौरभ स्वामी ने 15 मई को एक न्यूज पोर्टल को दिए अपने वक्तव्य में कहा कि आज अंतिम तारीख बढा रहे हैं, इस तारीख तक जो स्कूल्स जानकारी अपलोड नहीं करेंगे, यह मान लिया जाएगा कि इन स्कूलों को भुगतान की आवश्यकता नहीं है। उनके इस वक्तव्य के बाद प्रदेश के लगभग 10 हजार प्राईवेट स्कूल्स ने 22 मई तक यह जानकारी अपलोड कर दी है। गौरतलब रहे कि सरकार ने 17 मार्च, 18 मार्च और 12 अप्रैल को जारी अपने ही आदेशों में आनलाईन शिक्षण का कोई जिक्र नहीं किया था। इन आदेशों में कहा गया था कि स्माइल व स्माईल – 2 तथा आओ घर में सीखें कार्यक्रमों के आकलन के आधार पर कक्षा 7 वीं तक के स्टूडेंट्स को अगली कक्षा में प्रमोट किया जाता है।
सरकार के इस दोहरे रवैये का प्राईवेट स्कूल्स के विभिन्न संगठनों ने पुरजोर विरोध किया है। इन संगठनों ने मुख्यमंत्री, शिक्षामंत्री और निदेशक को पत्र ई मेल कर वस्तु स्थिति से अवगत कराते हुए आनलाईन शिक्षण सत्यापन प्रक्रिया को पूरी तरह से अनुचित और गैर जरूरी बताया। साथ ही सत्र 2020-21 का तथा उससे पूर्व के सभी सत्रों की बकाया राशि का भुगतान तुरंत करने की मांग की, लेकिन कोई भी सुनवाई नहीं होने के कारण अब राज्य के सात संगठनों ने सरकार की इस प्रक्रिया को न्यायालय में चुनौती देने की पूरी तैयारी कर ली है।
डॉ. (श्रीमती) बसन्ती हर्ष [responsivevoice_button voice="Hindi Female" buttontext="Listen this article"] मुख्य सम्पादक, पुष्करणा सन्देश (मासिक पत्रिका) हमारे भारत देश में वर्षपर्यन्त मनाये जाने वाले अनेकानेक...