अंतर्राष्ट्रीय माहवारी स्वच्छता प्रबन्धन दिवस पर ‘चुप्पी तोड़ो’ विषयक जाजम बैठकें आयोजित

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शाद्वल@बीकानेर। महिला अधिकारिता विभाग द्वारा अर्न्तराष्ट्रीय माहवारी स्वच्छता प्रबन्धन दिवस (28 मई) के मौके जिले की सभी ग्राम पंचायतों में ‘चुप्पी तोड़ो’ विषय पर माहवारी स्वच्छता प्रबन्धन विषयक जाजम बैठकें आयोजित की गई।

विभाग की उपनिदेशक मेघा रतन ने बताया कि जाजम बैठकें आयोजित करने का मुख्य उद्देश्य माहवारी सम्बन्धी कुरीतियों को दूर करना, माहवारी के समय स्वच्छता का ध्यान रखना तथा सेनेटरी नेपकिन का सही उपयोग व नष्ट करना सीखना था। इस दौरान साथिनों द्वारा किशोरियों और महिलाओं से खुलकर चर्चा की गई। सभी ब्लॉकों की दो-दो पंचायतों पर सम्बन्धित प्रचेता व पर्यवेक्षक द्वारा जाजम बैठकों में भाग लेकर उन्हें उड़ान योजना के बारे में बताया गया।

बीकानेर ग्रामीण ब्लॉक के पेमासर व उदासर ग्राम पंचायत पर संरक्षण अधिकारी सतीश परिहार व प्रचेता ने जानकारी देते हुए बताया कि माहवारी सम्बन्धी भ्रांतियों को दूर करना होगा। उन्होंने बताया कि किशोरियों व महिलाओं के लिए माहवारी आना आवश्यक है। समय रहते माहवारी ना आए तो चिकित्सा अधिकारी से सम्पर्क कर इलाज करवाना चाहिए। लापरवाही की स्थिति में यह गम्भीर बीमारी बन सकती है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री द्वारा 19 दिसम्बर 2021 को आईएम शक्ति उड़ान योजना शुरू की गई। इसमें बीकानेर की सात परियोजना की पांच-पांच पंचायतों पर सेनेटरी नेपकिन निःशुल्क वितरण किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि सभी आंगनबाड़ी केन्द्रों और स्कूलों में सेनेटरी नेपकिन निःशुल्क दिए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस दौरान लगभग 310 जाजम बैठकें आयोजित की गई तथा कुल 5 हजार 655 महिलाओं-किशोरियों ने भाग लिया।

अंतर्राष्ट्रीय माहवारी स्वच्छता प्रबन्धन दिवस

स्वास्थ्य के क्षेत्र में रोज़ नए प्रयोगों से लोगों को स्वस्थ रखने की कोशिश की जा रही है । आज भी समुदाय के बीच माहवारी स्वच्छता के विषय पर बात करने से कतराते हैं। जबकि माहवारी स्वच्छता के मुद्दे पर खुल कर बात करने की आवाश्यकता है। इसके बारे में लोगों को जागरुक करने के लिए प्रत्येक वर्ष 28 मई को मासिक धर्म स्वच्छता दिवस मनाया जाता है। कोरोना संक्रमण काल में भी किशोरियों एवं महिलाओं को माहवारी स्वच्छता पर जागरूक करना भी जरुरी है। जिला मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मीरा बघेल का कहना है “मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता बहुत जरुरी है। मां, बहनें और बेटियां कैसे स्वच्छ और स्वस्थ रहें विश्व मासिक धर्म स्वच्छता दिवस इसका संदेश देता है। माहवारी के दौरान अगर लम्बे समय तक स्वच्छता पर ध्यान नहीं दिया जाए तो बच्चेदानी में संक्रमण पहुँच सकता है। इससे गर्भधारण बाधित हो सकता है। किशोरावस्था में शरीर और मस्तिष्क का विकास तेजी से होता है। इन बदलावों को समझने और उसे सकारात्मक रूप से लेने के लिए किशोरियों को सही सलाह बहुत जरूरी है। 11 से 12 साल की किशोरियों में मासिक चक्र की शुरुआत होने लगती है। किशोरियों को सेनेटरी पैड और उसके महत्व के बारे में सटीक जानकारी नहीं होती है। किशोरियों को इस संबंध में उचित सलाह देकर जागरूक किया जाना चाहिये । किशोरियों को मितानिन, एएनएम एवं आंगनवाड़ी कार्यकर्ता निरंतर जागरूक करती हैं। किशोरियों को परामर्श करके माहवारी के दौरान असुरक्षित साधनों के इस्तेमाल की जगह सुरक्षित साधन जैसे सेनेटरी पैड के शत-प्रतिशत इस्तेमाल को सुनिश्चित करना चाहिये। मासिक धर्म स्वच्छता पर संकोच ना करें और इस पर खुल कर बात कराना चाहिये, हमेशा सेनेटरी पैड का इस्तेमाल करना चाहिये साथ ही माहवारी के दौरान स्वच्छता बनाए रखनी चाहिए, निश्चित अंतराल पर पैड को अवश्य बदलना चाहिए, छह घंटे के अंतराल पर सैनिटरी नैपकिन बदलना चाहिए, समय-समय पर अपने प्राइवेट पार्ट की सफाई करती रहें, माताएं किशोरियों को इसके बारे में खुलकर जानकारी दें झिझक को बीच में ना आने दें, अगर यात्रा पर हैं और शौचालय जाना हो तो सफाई वाली जगह पर जाएं, अपने बिस्तर की सफाई का ध्यान रखना चाहिए। समय-समय पर बेडशीट बदलती रहें, पीरियड्स के समय कई बार शरीर में दर्द होता है। इसलिए गर्म पानी से नहाएं, खान-पान का रखें ख्याल रखें पाचक आहार का सेवन करें।

28 मई का महत्व

मासिक धर्म स्वच्छता दिवस दुनियाभर की महिलाओं में मासिक धर्म की वजह से होने वाली परेशानियों के बारे में जागरूक करने लिए हर साल 28 मई को मनाया जाता है। इसकी शुरूआत साल 2013 में वॉश (जल स्वच्छता एवं स्वास्थ्य रक्षा) द्वारा की गयी थी । इस दिवस को पहली बार 28 मई 2014 में मनाया गया था। इसे 28 तारीख को मनाने खास वजह यह है कि महिलाओं को पीरियड्स 28 दिनों के अंतर से आते हैं।

भारत में मासिक धर्म स्वच्छता

2019-21 के नवीनतम राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS) -5 के आंकड़ों के अनुसार, मासिक धर्म के दौरान सुरक्षा के स्वच्छ तरीकों का उपयोग करने वाली 15-24 वर्ष की आयु की महिलाओं का प्रतिशत शहरी क्षेत्रों में 89.4 और 72.3 प्रतिशत हो गया है। NFHS-4 (2015-16) में ग्रामीण क्षेत्रों में क्रमशः 77.3 और 57.6 प्रतिशत दर्ज किया गया है। सर्वेक्षण के आंकड़ों के अनुसार, मासिक धर्म के स्वास्थ्य के बारे में महिलाओं में जागरूकता में वृद्धि हुई है।

हालांकि, एक रिपोर्ट स्पॉट ऑन: भारत में मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता में सुधार, के अनुसार खराब मासिक धर्म स्वच्छता के कारण रिप्रोडक्टिव ट्रैक्ट इंफेक्‍शन की घटनाओं में 70% की वृद्धि देखी गई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत में अभी भी लड़कियां मासिक धर्म के कारण पूरे साल 20 फीसदी बार स्कूल जाने में अनुपस्थित रहती हैं।. इसमें कहा गया है कि भारत में 88% मासिक धर्म वाली महिलाएं सैनिटरी पैड जैसे रैग्ज़, पुराने कपड़े, ऐश, लकड़ी की छाल, सूखे पत्ते, न्‍यूज पेपर, घास और प्लास्टिक के घरेलू विकल्पों का उपयोग करती हैं।

रिपोर्ट में भारत में खराब मासिक धर्म स्वच्छता के तीन प्रमुख कारणों पर प्रकाश डाला गया है और कहा गया है कि अगर इस पर ध्यान दिया जाए तो संख्या में आसानी से सुधार किया जा सकता है।

1. जागरूकता में सुधार

2. सूती कपड़े जैसे सैनिटरी नैपकिन के लिए लागत प्रभावी सामग्री प्रदान करना, जिसे यूनिसेफ जैसी प्रमुख अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों द्वारा स्वीकार्य सैनिटरी सामग्री माना गया है।

 3. टॉयलेट और सेफ वॉटर जैसी उचित सुविधाएं सुनिश्चित करना।

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