
डॉ अभय सिंह टाक
प्रत्येक भारतीय के लिए यह समय भारतवर्ष में लोकसभा के लिए आम चुनाव में सक्रियता के साथ जुड़ने का समय है। एक जिम्मेदार नागरिक होने के नाते मतदाता का यह परम कर्तव्य है कि वह अपने मताधिकार का प्रयोग करे। अपने प्रतिनिधि का सही चुनाव करना प्रत्येक मतदाता की जिम्मेदारी बनती है क्योंकि उसके द्वारा चुना गया प्रतिनिधि ही अगले पाँच वर्षों तक उसकी आवाज़ बनता है।
संविधान और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के अनुसार, कोई भी व्यक्ति किसी भी निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ सकता है, बशर्ते कि उसके पास उस निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ने की योग्यता हो किंतु भारतीय संविधान उससे भी बड़ा अधिकार मतदाता को दिया गया है कि वह अपने क्षेत्र के लिए सर्वश्रेष्ठ प्रतिनिधि का चुनाव करे। मतदान करना लोकतंत्र का आधार है इसलिए सभी मतदाताओं को लोकतन्त्र में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए न सिर्फ स्वयं मतदान करना चाहिए बल्कि मतदान के लिए अपने साथियों को भी प्रेरित करना चाहिए। जिससे योग्य उम्मीदवार का चयन हो सके जो जनता के मुद्दों को संसद में उठाए और अपने क्षेत्र की समस्याओं के समाधान के लिए सार्थक प्रयास करे।
आपका प्रतिनिधि सुशील, सशक्त एवं समर्थ होना चाहिए फिर वह चाहे किसी भी राजनीतिक दल का प्रतिनिधित्व करता हो। ध्यान रहे निर्दलीय उम्मीदवार भी भारी बहुमत से चुनाव जीतते रहे हैं और संसद में उनकी भूमिका गौरवशाली रही है। यदि कोई राजनीतिक दल आपके लिए कोई योग्य अभ्यर्थी ही नहीं चुन पा रहा है तो फिर उस राजनीतिक दल से किसी सुशासन की उम्मीद करना तो बेमानी है। आवश्यक नहीं है कि आपके द्वारा निर्वाचित सांसद मंत्री ही बने या उसका दल सत्ता में आए। सत्ता पर प्रभावी अंकुश के लिए भी प्रखर सांसद की भी बहुत आवश्यकता हैं। श्रेष्ठतम जनप्रतिनिधि का चुनाव जागरूक जनता ही कर सकती है।
किसी भी चुनाव में मतदाता ही सर्वेसर्वा होता है और वही अंतिम निर्णायक भी होता है। चुनाव से पहले सभी राजनीतिक दल अपना – अपना घोषणा पत्र लेकर आते हैं, जिसमें यह बताया जाता है कि उनका एजेंडा क्या है। ये राजनीतिक दल अपने घोषणापत्र में यह बताते हैं कि चुनकर आने पर वे जनता के हित में क्या-क्या काम करेंगे, कैसे सरकार चलाएंगे और जनता को क्या फायदा होगा। अर्थात् आदर्श आचार संहिता के प्रावधानों की भावना के अनुरूप यह घोषणापत्र जारीकर्ता के उद्देश्यों, विचारों, नीतियों और कार्यक्रमों की एक लिखित घोषणा है।
नामांकन के समय प्रत्येक प्रत्याशी को प्रारूप 26 में शपथ-पत्र प्रस्तुत करना होता है और प्रत्याशी को उसके बारे में पूछी गई समस्त जानकारियां अनिवार्य रूप से देनी होती है। लोकसभा चुनाव से पहले मतदाताओं को महत्वपूर्ण जानकारी के साथ सशक्त बनाने के लिए निर्वाचन आयोग ने एक नया एप लॉन्च किया है, जिसे मतदाता अपने मोबाइल में डाउनलोड कर किसी भी प्रत्याशी की व्यक्तिगत जानकारी प्राप्त कर अपने विवेक से अपने क्षेत्र के लिए सबसे योग्य प्रत्याशी का चुनाव कर सकता है। इसे केवाईसी (नो यॉर कैंन्डिडेट) का नाम दिया गया है। ऐप का उद्देश्य मतदाताओं को उनके संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों में खड़े चुनावी उम्मीदवारों की आपराधिक पृष्ठभूमि, संपत्ति और देनदारियों के बारे में जानकारी प्रदान करना है।
देश में लोकतांत्रिक परम्पराओं की मर्यादा को बनाए रखने के लिए स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं शांतिपूर्ण निर्वाचन के लिए चुनाव आयोग पारदर्शी व्यवस्था के साथ चुनाव आयोजित करवाने का प्रयास करता है। मतदाता को भी अपनी भूमिका जिम्मेदारी के साथ निभानी चाहिए। धर्म, वर्ग, जाति, भाषा आदि किसी भी प्रकार के प्रलोभन से अप्रभावित रहते हुए राष्ट्रहित में मतदान किया जाना चाहिए।
जय हिन्द!
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