
(विवेक मित्तल) बीकानेर। ऐसा प्रतीत होता है कि कोरोना महामारी के प्रकोप से बचने के लिए सरकार तथा सामाजिक संस्थाओं द्वारा चलाया गया जनजागरण अभियान तथा समाचार-पत्रों में प्रकाशित कोरोना संक्रमण के आंकड़े आमजन में इसके प्रति जागरूकता लाने में असफल रहे हैं या फिर जान कर भी अनजान बने हुए हैं। जिसका परिणाम यह है कि बीकानेर शहर में परकोटे के अन्दर और बाहर कमोबेश सभी जगह एक-सा दृश्य दिखाई देता है। सार्वजनिक स्थानों पर भीड़, मुख्य बाजार की सड़कों पर ट्रैफिक जाम और कोरोना महामारी के प्रति आमजन द्वारा दृढ़ता से धारण की हुई घोर उदासीनता और लापरवाही। नजरअन्दाज किया जा रहा है मास्क की उपयोगिता को। मास्क को गले में लटका कर रखना, नाक के नीचे तक रखना, ठोड़ी पर रख कर भीड़ का हिस्सा बन रहे हैं बेपरवाह लोग। ऐसा करने वाला न केवल स्वयं को खतरे में डाल रहे हैं अपितू परिवार, समाज और शहर के लिए भी खतरा बन रहे हैं।
कोरोना महामारी से सम्पूर्ण विश्व अभी भी संघर्षशील है, इसके इलाज की दवाई नहीं आयी है आजतक बाजार में। वर्तमान में बचाव की श्रेष्ठ उपचार है अतः अपने आपको इस बीमारी से बचाये रखने के लिए दिशा-निर्देशों का पालन स्वयं भी गम्भीरता से करें और दूसरों को भी प्रेरित करें। “गलती करने वालों को टोको और रोक अन्यथा कोरोना संक्रमण के गम्भीर परिणाम भोगो“। देश के विभिन्न शहरों में कोरोना संक्रमण पुनः अपने पाँव पसार रहा है। बीकानेर शहर भी इससे अछूता नहीं है। शहर में विगत दिनों से कोरोना संक्रमण अपना विकराल रूप धारण किये हुए है और भयावह ताण्डव मचा रहा है लेकिन शहर वासी लापरवाही बरतने से बाज नहीं आ रहे हैं। इस महामारी की भयावहता को वह व्यक्ति या उसका परिवार ही समझ सकता है जो इसके दंश से प्रभावित हुआ है। जिन्होंने अपनों को खोया है या मौत के मुंह से लौट कर वापिस आया है। कोरोना महामारी के इस आपदा काल में हम सभी को अपने-अपने हिस्से की नैतिक जिम्मेदारी को निभाते हुए कोरोना से स्वयं को बचाए रखते हुए दूसरों को भी बचाना है। घर से बाहर निकलते समय चेहरे पर मास्क और 2 गज की दूरी के नियम का पालन अवश्य करें। कोरोना के खिलाफ अगर अब लापरवाही बरती गई तो 8 माह की लम्बी लड़ाई जो आजतक हमने सफलतापूर्वक लड़ी है, हम हार जायेंगे। सजग और सावधान रहें क्योंकि सावधानी में ही समझदारी है।
हारेगा कोरोना-जीतेगा बीकाणा
