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शाद्वल@बीकानेर। बीकानेर के प्रतिष्ठित नागरी भंडार की सुदर्शना कला दीर्घा में नवकिरण सृजन मंच की तरफ से हास्य व्यंग्य कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। मूर्ख दिवस (1 अप्रेल) पर आयोजित हास्य विनोद के इस कार्यक्रम में आमंत्रित कवियों ने एक से बढ़कर एक हास्य व्यंग्य कविताओं की सस्वर प्रस्तुति देकर खूब तालियां बटोरी।

स्वागत उद्बोधन देते हुए साहित्यकार राजेन्द्र जोशी ने कहा कि जीवन में हंसी का अपना एक अलग ही महत्व है। हंसना-हंसाना जीवन का हिस्सा है इससे शरीर में ऊर्जा का संचार होता है। नवकिरण सृजन मंच के अध्यक्ष डॉ. अजय जोशी ने सृजन मंच के उद्देश्यों को साझा करते हुए कहा कि शहर के नवांकुरों को मंच देने हेतु इसका गठन किया गया है।

अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए शिक्षाविद डॉ. अभयसिंह टाक ने कहा कि समाज, संस्कृति एवं साहित्य में हास्य का अपना एक अहम स्थान है। यह नई उर्जा एवं नई दिशा प्रदान करता है। आज के दिन की उपादेयता को परिभाषित करते हुए डॉ. टाक ने कहा कि फाइनेंशियल वर्ष की समाप्ति पर थकान से त्रस्त आदमी को मूर्ख दिवस फीलगुड हार्मोन जनरेट करने का मौका देता है और नए टार्गेट्स हासिल करने की सुदृढ़ प्लानिंग के लिए तैयार करता है।

मुख्य अतिथि मनीषा आर्य सोनी ने परम्पराओं के साथ एक अप्रैल हंसी खुशी मनाने को संस्कारों से जोड़ते हुए अपना हास्य गीत तुम मां के आंचल जा छिपते करके मुझसे रार पिया, लिखूंगी क्या क्या तुझपे मैं तेरे कितने रूप पिया सुनाकर, माहौल को खुशनुमा बना दिया ।

विशिष्ट अतिथि राजाराम स्वर्णकार ने एक अप्रैल की महत्ता को इंगित करते हुए जब अपनी अपनी पुरानी किंतु आज भी ताजा हास्य रचना- नई नई स्कूटी थी, पीछे बैठी ब्यूटी थी उसके नखरे नाज उठाना जैसे मेरी ड्यूटी थी सुनाई तो श्रोताओं में हंसी का फव्वारा फूट पड़ा।

श्रोताओं से खचाखच भरे चले हॉल में तीन घण्टे चले इस कार्यक्रम में कवि कैलाश टाक ने कोरोना काल में अनुशासन पखवाड़े के तहत घर में पतियों की पतली हुई हालत पर जब अपना काव्य पाठ किया तो किया तो श्रोताओं की हंसी रोके ना रुकी। नीलम पारीक ने भी अपनी हास्य कविता में आपदा के उन क्षणों में भी पति-पत्नी की नोक-झोंक को बड़े मजेदार ढ़ंग से प्रस्तुत किया। राजस्थानी कवि सुरेश सोनी की कविता की प्रत्येक पंक्ति ने प्रत्येक श्रोता को हंसने पर मजबूर कर दिया। डॉ. कृष्णा आचार्य, शंकरसिंह राजपुरोहित ने मधुर स्वर में हास्य गीत सुनाए। संजय पुरोहित और अपने आत्माराम भाटी ने नवीन व्यंग्य आलेख प्रतुत कर कार्यक्रम को ऊंचाइयां प्रदान की। संचालन करते हुए हास्य कवि बाबू बमचकरी ने बीच-बीच में हास्य की फुलझड़ियाँ छोड़ते हुए सबको हंसने पर मजबूर किया।

जुगलकिशोर पुरोहित, नेमचंद गहलोत, शिवकुमार व्यास, शैलेन्द्र सरस्वती, इंद्रा व्यास, कासिम बीकानेरी, बी एल नवीन, राहुल रँगा, डॉ. पंकज जोशी, डॉ. जगदीश बारहठ, संजय हर्ष ने भी अपनी हास्य रचनाओं के माध्यम से सभी को गुदगुदाया।

कार्यक्रम में चन्द्रशेखर जोशी, एन डी रँगा, ऋषिकुमार अग्रवाल, डॉ. मोहम्मद फारूक, राजकुमार भाटिया, हरिकिशन व्यास, मधुसूदन सोनी, अनूप परिहार, महेश खत्री, प्रहलाद सिंह राजपुरोहित, हंसराज रावत, दीपक मिश्रा, सुधांशु सक्सेना सहित अनेक गणमान्य जन ने अपनी गरिमामयी उपस्थिती प्रदान की। संस्था की ओर से आभार शिक्षाविद मोहनलाल जांगिड़ ने ज्ञापित किया।

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