शिविरा की मेंबरशिप की बाध्यता नहीं है : निदेशक अग्रवाल

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शिविरा की मेंबरशिप की बाध्यता नहीं है : निदेशक अग्रवाल

आरटीई संबंधित भुगतान की प्रक्रिया शीघ्र शुरू की जाएगी

पैपा के प्रतिनिधि मंडल ने निदेशक को सौंपा ज्ञापन

शाद्वल@बीकानेर। आरटीई के अंतर्गत सत्र 2020-21 के भुगतान एवं शिविरा पत्रिका के सदस्य बनने की पाबंदी के संबंध में सोमवार को प्राईवेट एज्यूकेशनल इंस्टीट्यूट्स प्रोसपैरिटी एलायंस (पैपा) का एक प्रतिनिधि मंडल निदेशक, माध्यमिक शिक्षा गौरव अग्रवाल से मिला। पैपा के प्रदेश समन्वयक गिरिराज खैरीवाल के अनुसार निदेशक को दिए गए ज्ञापन में बताया गया है कि आरटीई के अंतर्गत सत्र 2020-21 के तहत भुगतान के लिए लागू की गई प्रक्रिया आधी अधूरी थी और वैधानिक भी नहीं थी। बिना किसी दिशा निर्देशों एवं गाईडलाईंस के जारी इस प्रक्रिया के तहत लगभग पचास प्रतिशत स्कूलों ने पोर्टल पर आनलाईन शिक्षण सत्यापन प्रक्रिया के अंतर्गत अपने अपने स्कूल की रिपोर्ट अपलोड नहीं की थी। अतः 2020-21 के अंतर्गत अध्ययन करने वाले समस्त स्टूडेंट्स ( जिन स्कूलों ने पोर्टल पर आनलाईन शिक्षण सत्यापन प्रक्रिया के अंतर्गत जानकारी अपडेट की और जिन्होंने अपरिहार्य कारणों से जानकारी अपडेट नहीं की) का भुगतान बिना किसी शर्त के अतिशीघ्र ही कराने के निर्देश जारी कराएं। सत्र 2020-21 के अंतर्गत आरटीई भौतिक सत्यापन सत्र 2021-22 के भौतिक सत्यापन के साथ ही लगभग पूरा हो गया है। इस सत्यापन प्रक्रिया के दौरान पात्र समस्त स्टूडेंट्स को शीघ्र से शीघ्र भुगतान के आदेश शिक्षा विभाग के माध्यम से तुरंत प्रभाव से जारी किए जाना चाहिए। ज्ञापन में कहा गया है कि सत्र 2018-19 में द्वितीय किश्त का भुगतान उन शिक्षण संस्थाओं को नहीं किया जा रहा है, जिन्होंने क्लेम बिल 30/11/2019 तक जनरेट नहीं किए थे। ऐसे स्कूल्स क्लेम बिल अपरिहार्य कारणों से ही जनरेट नहीं कर सके थे। अतः शीघ्र ही यह बैरियर (30-11-2019) हटाकर राज्य की हजारों स्कूल्स को राहत प्रदान कराई जाए। सत्र 2019-20 की प्रथम किश्त का भुगतान 31/12/2020 तथा द्वितीय किश्त का भुगतान 31/03/2021 के बाद नहीं किया जा रहा है, अतः ये दोनों बैरियर भी हटाने की आवश्यकता है। आरटीई प्रक्रिया शुरू होने से लेकर अब तक भुगतान से वंचित स्कूल्स को एक अवसर और दिया जाना चाहिए। शाद्वलऑबीकानेरआरटीई के अंतर्गत सत्र 2020-21 के भुगतान एवं शिविरा पत्रिका के सदस्य बनने की पाबंदी के संबंध में सोमवार को प्राईवेट एज्यूकेशनल इंस्टीट्यूट्स प्रोसपैरिटी एलायंस (पैपा) का एक प्रतिनिधि मंडल निदेशक, माध्यमिक शिक्षा गौरव अग्रवाल से मिला। पैपा के प्रदेश समन्वयक गिरिराज खैरीवाल के अनुसार निदेशक को दिए गए ज्ञापन में बताया गया है कि आरटीई के अंतर्गत सत्र 2020-21 के तहत भुगतान के लिए लागू की गई प्रक्रिया आधी अधूरी थी और वैधानिक भी नहीं थी। बिना किसी दिशा निर्देशों एवं गाईडलाईंस के जारी इस प्रक्रिया के तहत लगभग पचास प्रतिशत स्कूलों ने पोर्टल पर आनलाईन शिक्षण सत्यापन प्रक्रिया के अंतर्गत अपने अपने स्कूल की रिपोर्ट अपलोड नहीं की थी। अतः 2020-21 के अंतर्गत अध्ययन करने वाले समस्त स्टूडेंट्स ( जिन स्कूलों ने पोर्टल पर आनलाईन शिक्षण सत्यापन प्रक्रिया के अंतर्गत जानकारी अपडेट की और जिन्होंने अपरिहार्य कारणों से जानकारी अपडेट नहीं की) का भुगतान बिना किसी शर्त के अतिशीघ्र ही कराने के निर्देश जारी कराएं। सत्र 2020-21 के अंतर्गत आरटीई भौतिक सत्यापन सत्र 2021-22 के भौतिक सत्यापन के साथ ही लगभग पूरा हो गया है। इस सत्यापन प्रक्रिया के दौरान पात्र समस्त स्टूडेंट्स को शीघ्र से शीघ्र भुगतान के आदेश शिक्षा विभाग के माध्यम से तुरंत प्रभाव से जारी किए जाना चाहिए। ज्ञापन में कहा गया है कि सत्र 2018-19 में द्वितीय किश्त का भुगतान उन शिक्षण संस्थाओं को नहीं किया जा रहा है, जिन्होंने क्लेम बिल 30/11/2019 तक जनरेट नहीं किए थे। ऐसे स्कूल्स क्लेम बिल अपरिहार्य कारणों से ही जनरेट नहीं कर सके थे। अतः शीघ्र ही यह बैरियर (30-11-2019) हटाकर राज्य की हजारों स्कूल्स को राहत प्रदान कराई जाए। सत्र 2019-20 की प्रथम किश्त का भुगतान 31/12/2020 तथा द्वितीय किश्त का भुगतान 31/03/2021 के बाद नहीं किया जा रहा है, अतः ये दोनों बैरियर भी हटाने की आवश्यकता है। आरटीई प्रक्रिया शुरू होने से लेकर अब तक भुगतान से वंचित स्कूल्स को एक अवसर और दिया जाना चाहिए। 

जिला समान परीक्षा योजना के अंतर्गत शिविरा पत्रिका की सदस्यता की शर्त की बाध्यता नहीं

खैरीवाल ने बताया कि इस दौरान प्रतिनिधि मंडल ने शिविरा पत्रिका की सदस्यता के बाध्यता संबंधित परिवेदना निदेशक के समक्ष रखी। इस संबंध में निदेशक को जानकारी देते हुए बताया गया कि प्राईवेट स्कूल्स भी शिविरा पत्रिका के सदस्य शुरू से ही हैं। ये सही है कि कोविड के कारण शिविरा की सदस्यता संख्या में कमी आई है। इसके अलावा शिविरा के डिजिटल वर्जन के कारण भी सदस्य संख्या में कमी हुई है। लेकिन सदस्य संख्या में बढ़ोतरी करने के लिए पाबंदी लगाने और धमकी देने की प्रक्रिया अनुचित है, साथ ही सरकारी व गैर सरकारी शिक्षण संस्थाओं के लिए अलग अलग रेट्स भी उचित नहीं है। ज्ञापन में सुझाव दिया गया है कि यदि धमकी के बजाय निदेशालय द्वारा अपील की जाती तो निश्चित रूप सकारात्मक प्रभाव होता।खैरीवाल ने बताया कि निदेशक गौरव अग्रवाल ने सभी मांगों को पूरे ध्यान से सुना और कहा कि वे इस संबंध में आवश्यक कार्यवाही का संपादन शीघ्रता से करेंगे। निदेशक ने कहा कि किसी भी शिक्षण संस्था को जिला समान परीक्षा योजना के अंतर्गत शिविरा पत्रिका की सदस्यता की शर्त की बाध्यता नहीं रहेगी। वे तुरंत ही इस संबंध में अपने मातहतों को निर्देशित करेंगे। इस अवसर निदेशक गौरव अग्रवाल का स्मृति चिन्ह और शॉल भेंटकर अभिनंदन भी किया गया। पैपा के प्रदेश समन्वयक गिरिराज खैरीवाल के नेतृत्व में मिले प्रतिनिधि मंडल में संतोष कुमार रंगा, केवलचंद भूरा, रघुनाथ बेनीवाल, नंदकिशोर कच्छावा, रमेश बालेचा, ताराचंद किलानिया, मुकेश पांडे, सुरेंद्र शर्मा, रामदेव गौर, सुरेश सैनी, अनुज सुरोलिया, शिव कुमार शर्मा, अनिल पालीवाल इत्यादि शामिल थे।इस दौरान शिविरा की वरिष्ठ संपादक सुनीता चावला और जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक शिक्षा) सुरेन्द्र सिंह भाटी से भी शिविरा पत्रिका के सदस्य हेतु बाध्य करने संबंधित बात करने पर दोनों ही अधिकारियों ने कहा कि किसी भी स्कूल के पेपर्स शिविरा की मेंबरशिप नहीं लेने के कारण नहीं रोके जाएंगे।

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