गतिशीलता के पर्याय, सकारात्मक उर्जा के स्त्रोत – राजेन्द्र जोशी

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गतिशीलता के पर्याय, सकारात्मक उर्जा के स्त्रोत – राजेन्द्र जोशी

राजाराम स्वर्णकार

आज के इस आपाधापी के दौर में सकारात्मकता का मिलना मुश्किल है। इस दौर में व्यक्ति खुद के विकास और प्रोजेक्ट में लगा रहता है उसे दूसरे के दुःख दर्द की खबर नहीं रहती। ऐसे दौर में सकारात्मक इन्सान का मिलना सोभाग्य की बात है। सकारात्मक उर्जा से प्रकाशवान वह इन्सान युवा संस्कृतिकर्मी श्री राजेन्द्र जोशी है। राजेंद्रजी एक अच्छे इन्सान हैं इसलिए इनकी वाणी और रचनाएँ इंसानियत से ओतप्रोत हैं, जो इन्सान के मानस पर गहरा प्रभाव डालती हैं। राजेंद्रजी विपरीत परिस्थितियों में भी अटल रहते हैं। वे मान अपमान से काफी ऊँचे हैं। वे हर इन्सान को सम्मान देने वाले इन्सान हैं। राजेंद्रजी ने जीवन के हर क्षेत्र में अपना मार्ग स्वंय बनाया है और सफलता की नई मंजिलें तय की हैं। साक्षरता आन्दोलन से साहित्य तक एक एक्टिविस्ट की तरह उन्होंने अपनी एक विशेष जगह बनायी है। इनके बारे में लिखने से पहले सोचना पड़ता है कि किस विषय पर लिखा जाए यथा साहित्य, संगठन, प्रशासन, कहानी-लेखन या आधुनिक कविता आदि-आदि।

       रत्न प्रसविनी रत्न धरा छोटी काशी बीकानेर में राजेन्द्र जोशी का जन्म 29 जुलाई 1962 को श्री नन्दलालजी जोशी के यहां हुआ। एम.ए. (इतिहास) बी.एड. करने के बाद राजेन्द्र जोशी साक्षरता आन्दोलन से जुड़ गये। श्री जोशी जिला साक्षरता एवं सतत शिक्षाधिकारी, बीकानेर कार्यालय में सहायक परियोजना अधिकारी (वरिष्ठ) के पद पर हैं, जहां अधिकांश समय कार्यालयाध्यक्ष के पद रिक्त रहने के कारण कार्यालयाध्यक्ष एवं जिला साक्षरता सचिव का दायित्व निर्वहन करते हुए जिले में साक्षरता के लक्ष्यों को पूर्ण किया है। जिले को देश में प्रतिष्ठा दिलाने में महत्ती भूमिका निभाई है। इसलिए अपने कार्यकाल में जिला कलक्टरों के प्रिय हैं और अपने पद के इतर चुनावों और कोरोना काल में नई नई भूमिकाओं में सफल होते हैं। जिला प्रशासन में विभिन्न भूमिकाओं में रहते हुए राजेंद्रजी  हिन्दी एवं राजस्थानी की विविध विधाओं में तीन दशक से निरंतर सृजनरत हैं। प्रमुख समाचार पत्र-पत्रिकाओं में राजेन्द्रजी के आलेखों, कविताओं, समीक्षाओं, निबन्धों, एवं कहानियों का प्रकाशन होता रहा है। सामाजिक कार्यों में सदैव आगे रहने वाली स्वयंसेवी संस्था ‘मुक्ति’ के सचिव राजेन्द्रजी, शांत चित मगर काम के प्रति गम्भीर हैं। राजेन्द्रजी का व्यक्तित्व ही ऐसा है कि पहली मुलाकात में ही इनकी योग्यता का पता चल जाता है। अगर मैं यूं कहूं तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी कि जो बात राजेन्द्रजी को कहनी होती है वह हंसते-हंसते डंके की चोट कह देते हैं। आम नागरिक एवं अधिकारियों के साथ राजेन्द्रजी का मधुर व्यवहार और तकिया कलाम “कसर फिर कभी निकालवा देंगे” काफी प्रसिद्ध है। जो उनकी आशावान और सकारात्मकता की मिसाल है। यही प्रसिद्धि राजेन्द्रजी को शिखर तक ले जा रही है।

     आपकी प्रकाशित कृतियां हैं:-  राजस्थान के स्वतंत्रता सेनानी-वैध्य मघाराम (हिन्दी एवं राजस्थानी), राजस्थान के स्वतंत्रता सेनानी-रघुवरदयाल गोइल (जीवनी), धुएं की पोशाक (बाल कथा संग्रह), हिन्दी काव्य संग्रह ‘सब के साथ मिल जाएगा’ (वर्ष 2011), ‘मौन से बतकही’ एवं ‘एक रात धूप में’ (वर्ष 2016) सहित राजस्थानी में चर्चित कहानी संग्रह ‘अगाडी’ (वर्ष 2015)। श्री मालचन्द तिवाड़ी के राजस्थानी कविता संग्रह ‘उतरयो है आभो’ का अनुवाद हिन्दी में ‘उतरा है आकाश’ किया। इस पुस्तक को केन्द्रीय साहित्य अकादेमी नई दिल्ली ने पुरस्कृत किया था।   जोशी का कहानी संग्रह “प्लाट नंबर-203” इन दिनों चर्चा में है। मजदूरी की पोटली, राजस्थानी कहानी संग्रह ‘ओट’, आखर गंगा भाग एक, दो एवं तीन का शानदार लेखन किया। मासिक बुलेटिन आखर उजास का करीबन दस वर्षों तक सम्पादन किया। इसके साथ ही राजस्थान सरकार के शिक्षा विभाग से प्रकाशित पुस्तक ‘राता फूल रचाव रा’ राजस्थानी विविधा का सम्पादन किया। जोशी ने बहुत कम समय में “आधुनिक लघु कथाएं” पुस्तक का भी सम्पादन करके एक इतिहास रच दिया।   

       साहित्यकार राजेन्द्र जोशी पर वर्ष 2010 में महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय में लघु शोध विश्लेषणात्मक अनुशीलन, 2013 में कविता संसार: कथ्य शिल्प और वैचारिक विषय, इसी प्रकार वर्ष 2013-14 एवं 2016 में राजेन्द्र जोशी के साहित्य में लोक जीवन एवं लोक संस्कृति विषय पर लघु शोध हो चुके हैं।

         जनसता के सम्पादक मुकेश भारद्वाज कहते हैं कि राजेन्द्र जोशी की कविताएं वक्रोक्ति और अन्योक्ति के भार से दबी हुई नहीं है। कवि-कथाकार मालचन्द तिवाड़ी कहते हैं कि उनकी कविताओं में सरल और निष्कपट-सा सामाजिक सरोकार हमेशा गूंजता सुनाई पड़ता है। वरिष्ठ व्यंग्यकार बुलाकी शर्मा उन्हें एक ऐसा कहानीकार बताते हैं जिनके प्रभाव से पाठक काफी समय तक मुक्त नहीं हो सकता। वरिष्ठ पत्रकार मधु आचार्य ‘आशावादी’ राजेन्द्रजी के विषय को उठाने के तरीके के कायल हैं। आचार्य कहते हैं कि खासतौर से कविता कहते समय राजेन्द्र जोशी एकदम से चकित करते हुए पाठक को विचार के एक नए आयाम पर ले जाते हैं।

       26 जनवरी 1990 (गणतंत्र दिवस) को जिला प्रशासन बीकानेर द्वारा साक्षरता के प्रचार-प्रसार में उल्लेखनीय सेवाओं के उपलक्ष में सार्वजनिक सम्मान किया गया। 15 अगस्त 1993 (स्वाधीनता दिवस) पर जिला प्रशासन द्वारा प्रौढ़ शिक्षा एवं खेलों में उल्लेखनीय कार्य करने पर पुन: सार्वजनिक सम्मान किया गया। साक्षरता सप्ताह में उल्लेखनीय योगदान हेतु राष्ट्रीय साक्षरता मिशन बीकानेर द्वारा 8 सितम्बर 1993 को सम्मानित किया गया। जोशी के अथक प्रयासों से ही बीकानेर जिले को सत्येन मैत्रैय पुरस्कार 8 सितम्बर 2002 को राष्ट्रीय साक्षरता मिशन नई दिल्ली द्वारा प्रदान किया गया। भारतीय मेडिकल एसोसिएशन ने भी जोशी के कार्यों का सम्मान किया। राव बीकाजी संस्था एवं जिला प्रशासन बीकानेर द्वारा नगर स्थापना दिवस पर “राव कान्धल अवार्ड” प्रदान किया गया। इसी प्रकार 26 जनवरी 2013 को नगर विकास न्यास, बीकानेर द्वारा “मैथिलीशरण गुप्त हिन्दी साहित्य पुरस्कार प्रदान किया गया। नगर-निगम बीकानेर एवं जिला प्रशासन, बीकानेर से चार बार सम्मानित, छतीसगढ़ में प्रोफेसर सहदेवसिंह स्मृति पुरस्कार एवं सम्मान प्राप्त कर चुके राजेन्द्र जोशी सभी के दिलों में छाए हुए हैं।

       आपकी लेखनी यूं ही निर्बाध चलती रहे, और ज्यादा उत्कृष्ट रचती रहे। यह कहा जा सकता है कि राजेन्द्र जोशी के मुस्कुराते चेहरे में आकर्षण की चुम्बकीयता है जिससे सृजनधर्मी इनसे जुडते चले जाते हैं और ये सभी को अपने साथ जोड़ते रहते हैं।                        

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